Skip to main content

Posts

Featured

गीता ज्ञान

 💐💐क्रोध से भिड़ो नहीं, उसे मोड़ो*💐💐 एक बार सात्यकि, बलराम एवं श्रीकृष्ण यात्रा कर रहे थे । यात्रा करते-करते रात हुई तो उन्होंने जंगल में पड़ाव डाला और ऐसा तय किया कि दो लोग सोयें तथा एक जागकर पहरा दे क्योंकि जंगल में हिंसक प्राणियों का भय था । पहले सात्यकि पहरा देने लगे और श्रीकृष्ण तथा बलराम सो गये । इतने में एक राक्षस आया और उसने सात्यकि को ललकारा : ‘‘क्या खड़ा है ? कुछ दम है तो आ जा । मुझसे कुश्ती लड़ ।’’ सात्यकि उसके साथ भिड़ गया । दोनों बहुत देर तक लड़ते रहे । सात्यकि की तो हड्डी-पसली एक हो गयी । सात्यकि का पहरा देने का समय पूरा हो गया तो वह राक्षस भी अदृश्य हो गया ।  फिर बलरामजी की बारी आयी । जब बलरामजी पहरा देने लगे तो थोड़ी देर में वह राक्षस पुनः आ धमका और बोला : ‘‘क्या चौकी करते हो ? दम है तो आ जाओ।’’ बलरामजी एवं राक्षस में भी कुश्ती चल पड़ी । ऐसी कुश्ती चली कि बलरामजी की रग-रग दुखने लगी । श्रीकृष्ण का पहरा देने का समय आया तो वह राक्षस दृश्य हो गया । बलरामजी श्रीकृष्ण को कैसे बताते कि मैं कुश्ती हारकर बैठा हूँ ? श्रीकृष्ण पहरा देने लगे तो वह राक्षस पुनः आ खड़ा हुआ और बोला ...

Latest Posts

शिव ज्ञान

प्रभु नाम की महिमा

राम से बड़ा राम का नाम/नाम जप की महिमा

प्रभु राम की कृपा

Ramnavmi special | जय श्री राम बोलो गूंज उठेगा सारा हिन्दुस्तान | jai shri ram | नवमी 2020

श्री राम

Collection

बाला जी